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सन् १९२० में जापान में श्रीमति किमी कोतानी तथा श्री
काकूतारो कूबो ने इस लाभ रहित संस्था - रेयूकाई की स्थापना की। इन्होंने
एक ऐसी विधि का आविष्कार किया जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति
' शाक्यमुनि बुद्ध
' की शिक्षा को व्यक्तिगत
जीवन में, अपनी दिनचर्या में व्यस्त रहते हुए भी, अपना सकता है। शाक्यमुनि बुद्ध ने जिन
अनेक सिद्धान्तों की खोज की उनमें से महत्वपूर्ण है सृष्टि में विद्यमान
प्रत्येक रचना में पारस्परिक सम्बंध।
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