रेयूकाई क्या है?
 
 
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एक आध्यात्मिक बन्धुत्व
 

सन् १९२० में जापान में श्रीमति किमी कोतानी तथा श्री काकूतारो कूबो ने इस लाभ रहित संस्था - रेयूकाई की स्थापना की। इन्होंने एक ऐसी विधि का आविष्कार किया जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति ' शाक्यमुनि बुद्ध ' की शिक्षा को व्यक्तिगत जीवन में, अपनी दिनचर्या में व्यस्त रहते हुए भी, अपना सकता है।

शाक्यमुनि बुद्ध ने जिन अनेक सिद्धान्तों की खोज की उनमें से महत्वपूर्ण है सृष्टि में विद्यमान प्रत्येक रचना में पारस्परिक सम्बंध।
 





 

   


रेयुकाई इंडिया जापानी भाषा स्कूल


नई दिल्ली (इंडिया) में निःशुल्क जापानी भाषा कक्षाएं आयोजित की जाती हैं

विवरण सूची एवं पाठ्यक्रम की जानकारी

वर्कशाप

आध्यात्मिक सहचर्या संस्था अपने सदस्यों के लिए विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित करती है


 

श्रीमति किमी कोतानी तथा काकूतारो कूबो ने पाया कि शाक्यमुनि बुद्ध की विचारधारा वास्तविकता तथा मनुष्य जाति के जीवनशैली पर आधारित है तथा यह विचारधारा सृष्टिकर्ता या उसके किसी अवतार से सम्बंधित नहीं है। इसी कारण ये विचार किसी भी धार्मिक विश्वास का विरोध नहीं करते, अतः किसी भी स्थापित धार्मिक अभ्यास को मानने वाला कोई भी व्यक्ति इन विचारों को अपने धर्म से स्वतंत्र या संयुक्त रूप में अपना सकता है। रेयूकाई का दृढ़ विश्वास है कि जैसे किसी भी वैज्ञानिक सिद्धांत का आविष्कार तथा पनआविष्कार किया जा सकता है तथा जिस प्रकार इन आविष्कारों का कोई भी वैज्ञानिक उपयोग कर सकता है उसी प्रकार शाक्यमुनि बुद्ध के शोधित सिद्धान्तों को कोई भी पुनः खोज सकता है तथा उन्हें अनुभव करके, अपना कर, अपने स्वयं की जीवन प्रक्रिया में सुधार ला सकता है।

 

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