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शाकादेन
 

शाकादेन नवंबर 9, 1975 को उस परिसर पर पूर्ण किया गया जहां पूर्व रेयूकाई मुख्यालय का हाल स्थित है। इसके संस्थापक काकुतारो कूबो ने दिसंबर 1937 में टोक्यो शहर में अज़ाबु-लिगुरा पर मूल स्थल का निर्माम किया था और इसे रेयूकाई की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार का केंद्र बनाया था।


कूबो ने एक बार किमी कोतानी से इस संस्थापना के महत्त्व का उल्लेख करते हुए कहा था कि ??यह रेयूकाई की नींव का कार्य करेगा और इसमें से एक बड़ी तादाद में लोग विश्व शांति के लिए कार्य करेंगे।?? कोतानी ने कूबो की इच्छा को आज्ञा के रूप में लेकर शाकादेन के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। आज शाकादेन बैठक हाल के रूप में प्रयुक्त होता है और रेयुकाई के सदस्यों व स्थानीय लोगों के लिए सामाजिक केंद्र के रूप में भी। यह विशेष भवन है जहां लोग आर रेयूकाई के तत्त्व-ज्ञान की जानकारी हासिल कर सकते हैं।




 

   


रेयुकाई इंडिया जापानी भाषा स्कूल


नई दिल्ली (इंडिया) में निःशुल्क जापानी भाषा कक्षाएं आयोजित की जाती हैं

विवरण सूची एवं पाठ्यक्रम की जानकारी

वर्कशाप

आध्यात्मिक सहचर्या संस्था अपने सदस्यों के लिए विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित करती है


 



मुख्य बैठक हाल के अतिरिक्त शाकादेन परिसर में एक छोटा बैठक हाल, नौ सम्मेलन कक्ष, अल्पाहार-गृह, पुस्तक की दुकान, पौधशाला और चिकित्सा केंद्र हैं। पाठ्य समूहों से लेकर सुलेखन कक्षाओं के आयोजन के दौरान इन सुविधाओं का उपयोग किया जाता है।  
 

शाकाडेन का मुख्य हॉल रेयूकाई हेतु बैठक के लिए सबसे बड़ा हॉल है। यह वह हॉल है जहां प्रत्येक शाखाएं अपनी वार्षिक बैठकें आयोजित करती हैं। साथ ही यह हॉल प्रत्येक दिन खुला रहता है। हॉल का वातावरण शांत है जहां सदस्य अपने दिनचर्या से मुक्त होकर विश्राम के क्षण बिताने आ सकते हैं। हॉल के मुख्य स्थान पर उठे हुए प्लैटफ़ॉर्म वाला बड़ा मंच है जहां पूर्वजों की उपासना की उपासना एवं पूजा हेतु, फल एवं खीर चढ़ाए जाते हैं। इसके ठीक पीछे एक कैबिनेट है जिसमें पांच धर्मपत्र एवं रेयूकाई के मृत सदस्यों व ग़ैर-सदस्यों के नामों की एक पंजी रखी हुई है। इन सदस्यों व ग़ैर-सदस्यों ने संगठन व समाज के विकास के लिए महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था।



Shakaden Hall

इस मंज के ऊपर व ठीक पीछे शाक्यमुनि बुद्ध की आठ मीटर ऊंची विशाल मूर्ति मौजूद है। विशेषज्ञ शिल्पकार सीको सवाडा ने इस मूर्ति को तराशने में छः वर्ष का समय लिया था और इसे एक हज़ार वर्ष पुराने कपूर काठ के एक ही हिस्से से तराशा था। शाक्यमुनि की प्रतिमा शाकाडेन की दीवारों के भीतर एक पृथक हिस्से में स्थिर है जिसे नीचे गहरी भूमि तक धंसाए गए तीन स्तंभों पर सहारा दिया गया है। इस मूर्ति को तापमान एवं आद्रता नियंत्रित कश्र में रखा गया है जो कपूर काठ को संरक्षित रखता है। मुख्य हॉल में बैठकों के दौरान इस कक्ष के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और शाक्यमुनि की प्रतिमा देखी जा सकती है। बैठकें सामान्यतः प्रत्येक महीने की 9 या 18 को आयोजित की जाती है। इन दो तारीखों को रेयूकाई के दो स्थापकों की मृत्यु के स्मरण में मनाया जाता है। इन दोनों स्थापकों की मूर्तियां मंच के दोनों ओर रखी हुई है।


मुख्य हॉल के ठीक नीचे खुला स्थान है जहां लोग विश्राम करते हुए एक दूसरे से बातचीत कर सकते हैं। अथवा उत्सवों या समारोहों द्वारा मनोरंजन में भाग ले सकते हैं। प्लाज़ा नाम के इस स्थान में 1000 से भी अधिक लोग आ सकते हैं और इस स्थान का रेयूकाई द्वारा और शाकाडेन के समीप रह रहे लोगों द्वारा उपयोग किया जाता है।

भूकंप या प्राकृतिक विपदा के दौरान शाकाडेन प्लाज़ा का आसपास रह रहे लोगों द्वारा शरणागार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके ठीक नीचे 400 टन की क्षमता वाली जल टंकी है जिसमें आपातकाल में उपयोग किए जाने हेतु पेयजल रखा जाता है जिसे शाकाडेन के आसपास आग लग जाने की स्थिति में अग्नि शमन विभाग द्वारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

 



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