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रेयूकाई भारत
आध्यात्मिक सहचर्य संस्था


 कार्यशालाएं >> ग्रूम ग्रूप वर्कशाप (ग्र. ग्र. व)
 



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ओया व कोडोमो अर्थात् मार्गदर्शक व अनुयायी के बीच निरंतर संपर्क में बढ़ती कठिनाइयों को दूर करने के लिए, तथा नेतृत्व का उच्चतर स्तर बनाने के लिए शिक्षा व गतिविधि समिति के तत्वावधान में एक ग्रूम ग्रूप गठित की गई।

ग्रूम ग्रूप सदस्यों में से भावी प्रमुख चुनती है। इसका उद्देश्य है कि निरंतर संपर्क और समय-समय पर आयोजित ग्रूम ग्रूप कार्यशालाओं के माध्यम के द्वारा रेयूकाई के अभ्यास की निरंतर में वृद्धि लाया जाए।


टी. ए. पी. समिति

रेयूकाईकेयर
अध्यात्मिक सहचर्य संस्था

वर्कशाप

आध्यात्मिक सहचर्या संस्था अपने सदस्यों के लिए विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित करती है

ग्रूम ग्रूप वर्कशाप

स्वर व उच्चारण प्रशिक्षण

ध्यान

ग्रूम ग्रूप

आध्यात्मिक सहचर्या संस्था के ग्रूम ग्रूप ने निम्नलिखित को इस ग्रूप के सदस्यों के रूप में नियुक्त किया है :

1. श्री सुशील दहिया चौथी शाखा के शिबुचो व स्टाफ़ सदस्य
2. श्री एन.एस. रावत चौथी शाखा के शिबुचो व स्टाफ़ सदस्य
3. श्री बागीश्वर साह चौथी शाखा के शिबुचो व स्टाफ़ सदस्य
4. स्थानीय क्षेत्र रेज़िडेंट शिबुचो इसका अर्थ है कि वह रेज़िडेंट शिबुचो क्षेत्र जहां ग्रूम ग्रूप कार्यशाला आयोजित की जा रही है। (यदि "गया" में प्रशिक्षण आयोजित की जाती है तो श्री पी.के. सिन्हा सदस्य होंगे)

प्रतिभागी

प्रत्येक क्षेत्र में स्थिति अलग-अलग होती है पर कम से कम जुन-होज़ाशु या इससे ऊपर किया जाए तो बेहतर होता है।
 

ग्रूम ग्रूप कार्यशाला के लिए व्यापक कार्यक्रम

  1. सूत्र जाप : जिसमें स्थआनीय देशी और पूरा ग्रूप जाप करता है।

  2. स्व-परिचय : जिसमें सभा का प्रत्येक सदस्य अपना परिचय देता/देती है।

  3. प्रशिक्षण का उद्देश्य : ग्रूम ग्रूप के सदस्य इसके बारे में विस्तार से बताएंगे।

    • प्रशिक्षण का उद्देश्य : भविष्य के प्रमुख तैयार करना

    • 30,000 सदस्य के लक्ष्य की पूर्ति

    • ओया-कोडोमो संबंधों की कमी से उत्पन्न कठइनाइयों को दूर करना।

  4. ओया-कोडोमो संबंधों की कमी से उत्पन्न कठइनाइयों को दूर करना।

  5. क्षेत्र में उठने वाले क्यों और किसलिए जैसे प्रश्नों पर खुली चर्चा

  6. ग्रूम ग्रूप क्षेत्र की स्थिति के अनुरूप मार्गदर्शन देता है। इसमें रेयूकाई के अभ्यास की विधि में उप-प्रमुखों के लिए तत्कालीन प्रशिक्षण दिया जाता है जिसमें भूमिका अदा करने, सदस्यों के मध्य चर्चा आदि शामिल है।

  7. भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारण। यह व्यक्तिगत स्तर से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक होना चाहिए।

  8. ऊपर उल्लिखित व्यापक कार्यक्रम मार्गदर्शन के लिए है। क्षेत्र-विशेष कार्यक्रमों में अलग-अलग सारांश हो सकते हैं।

 

 टॉप

 रेयुकाई जीवनशैली से बढ़कर और भी कुछ है ।
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