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मेरा नाम श्रीवास्तव है और श्री सुशील
दहिया मेरे ओया हैं। मैं रेयुकाई की चौथी शाखा से संबंध
रखता हूं। वर्तमान में मेरे शिबु के अधीन मेरे पास 1500
से भी अधिक सदस्य हैं। 1993 में रेयूकाई की सदस्यता
ग्रहण की और अब मैंने शिबुचो की अर्हता प्राप्त कर ली
है। मुझे जापान यात्रा करने के दो अवसर मिले. मेरा जन्म
उत्तर प्रदेश में फर्रूख़ाबाद ज़िले के फ़तेहगढ़ नगर में
हुआ था। मेरे परिवार में माता, पिता, एक बड़ा भाई, भाभी
और दो छोटी बहनें हैं।
मैंने स्कूली शिक्षा फ़तेगढ़ में पूरी
की और उच्च शिक्षा आगरा एवं कानपुर में ग्रहण किया।
मैंने श्री सुशील दहिया के संपर्क व माध्यम से रेयुकाई
में प्रवेश प्राप्त किया। श्री दहिया केंद्र सरकार के
सदस्य श्री सलमान खुरशीद के साथ फ़तेहगढ़ का दौरा किया
करते थे।
श्री दहिया जब भी
फ़तेहगढ़ आते, तब स्थानीय क्षेत्र में लोगों को
सदस्य बनाते। सदस्य बनाने की इस प्रक्रिया में
तेज़ी लाने के प्रयोजन से श्री दहिया रेयुकाई की
शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए फ़तेहगढ़
में समय-समय पर सामान्य बैठकें आयोजित किया करते
थे। इन बैठकों के दौरान वे पूरे भारत में अनुसरण
किए जा रहे इस संगठन के प्रमुख लक्ष्यों,
उद्देश्यों व गतिविधियों पर चर्चा करते थे।
उस समय मैं आगरा विश्वविद्यालय
का छात्र था और छात्र कल्याण संगठन का प्रमुख
था। अन्य युवा राजनैतिक कार्यकर्ताओं की भांति
मैं भी श्री सलमान खुरशीद के साथ सामाजिक व
राजनैतिक रूप से जुड़ा था। मेरी मानसिकता
अत्याचारी व आक्रामक प्रवृत्ति की थी। एक दिन
श्री दहिया ने मुझसे एक सामान्य बैठक में शामिल
होने के लिए कहा।
आज मैं इस बात को सच्चाई के साथ स्वीकार कर सकता
हूं कि उस समय संगठन से जुड़ने के पश्चात् मुझे
इसमें या इसके लक्ष्यों अथवा उद्देश्यों में कोई
रुचि नहीं थी। समय-समय पर गतिविधियां आयोजित की
जाती थीं और केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए
मैं उन बैठकों में हिस्सा लिया करता था।
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