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  श्री संजय श्रीवास्तव, फ़र्रूख़ाबाद

  श्री आर.पी. सिन्हा, बोकारो




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श्री आर.पी. सिन्हा, बोकारो
 

मेरा नाम आर. पी. सिन्हा है और मैंने भारत के राज्य झारखंड में बोकारो स्थित शिबुचो के 4थी शाखा में प्रवेश लिया। मैंने मार्च 1984 में रेयुकाई की सदस्यता ग्रहण की। मेरे ओया श्री के.पी.आर. बंधु हैं। मेरे अपने 600 सदस्य हैं।

मेरा ध्येय समाज सेवा था इसलिए मैंने शुरू से ही सदस्य के रूप में प्रवेश लिया। मैं मेरे ओया व वरिष्ठ सदस्यों के सहयोग से कार्य शुरू करता हूं। शुरुआत में मुझे रेयूकाई को समझने में कठिनाई हुई। श्री टी. हाशीगुची, श्री एच. मायेकावा एवं श्री एच. नाकाजीमा द्वारा प्रोत्साहित किए जाने और इनके सहयोग से मेरे लिए यह सरल व साधारण सा रो गया। इन्होंने मुझे लोगों से उचित ढंग से संपर्क करने में सहयोग दिया और इससे  1990~1991 में मेरे सदस्यों की संख्या में वृद्धि हुई।

मैंने अपने में दुर्घटनाएं, उतार-चढ़ाव और अन्य समस्याओं का सामना किया। परंतु इन सबके बावजूद भी मैंने न तो संगठन छोड़ा और न ही क्षीण पड़ा। उदाहरण के तौर पर आज 18 वर्ष उपरांत मैंने रेयूकाई सदस्यों के सामने शिबुचो के लिए आवेदन किया। मैं मानसिक रूप से परेशान था और किसी भी कार्य पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। परंतु नियमित अभ्यास से मैंने अपने-आप को संभाला और 1997 में मेरे पास जो कुछ भी बचा था उसे मैंने शिमेन्जा पर्वत पर लिए गए प्रशिक्षण द्वारा पुनः प्राप्त किया। मैं शिमेन्जा प्रशिक्षण पर जाने से डरता था क्योंकि मैं वह पर्वत चढ़ने से घबराता था। पर जब आयु में मैंने अपने से बड़े लोगों को पाने के लिए इच्छुक देखा तो मुझे प्रोत्साहन मिला और मैं भी उस पर्वत पर चढ़ा। उस समय मैंने अपने भीतर एक चमत्कारी शक्ति महसूस की जिससे में ऐसा कर सका। अब मैं मानसिक रूप से मुक्त हूँ और प्रसन्न हूं।

मेरा मुख्य ध्येय हैं समारोह आयोजित करना और लोगों से संपर्क बनाकर अपना समय व्यतीत करना। इससे सदस्य अपने व्यक्तित्व और नेतृत्व के गुणों को विकसित कर सकते हैं। इससे प्रचार कार्य में तेज़ी आती है। मिचिबिकी के लिए अभ्यस्त किए गए सभी प्रमुख प्रचार कार्य करते हैं।




 

   


रेयुकाई इंडिया जापानी भाषा स्कूल


गुरगांव (इंडिया) में निःशुल्क जापानी भाषा कक्षाएं आयोजित की जाती हैं

विवरण सूची एवं पाठ्यक्रम की जानकारी

वर्कशाप

आध्यात्मिक सहचर्या संस्था अपने सदस्यों के लिए विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित करती है


 



मैंने मेरे सबसे निकट व्यक्तियों जैसे मेरी पत्नी और श्री जे.पी. मंडल को खो दिया। एक बड़े धक्के के बाद मैं सब कुछ भूल गया। एक रात्रि मेरी मृत पत्नी मेरे सपने में आई और मुझसे मेरे स्वास्थ्य और हमारे बच्चों का ध्यान रखने के लिए कहा। उसने मुझे दृढ़ रहने के लिए प्रोत्साहित किया और मुझे रेयुकाई करने के लिए कहा। यों तो वह मुझसे सपने में कह रही थी परंतु मुझे लगा कि वह मेरे सामने ही प्रत्यक्ष रूप में थी। मैंने उसे वचन दिया कि मैं रेयूकाई संगठन के भावी विकास के लिए कार्य करूंगा।

सदस्यों के बारे में मेरी राय यह है कि जो आध्यात्मिक संसार में अपने वचनों को पूरा नहीं कर सकते, वह कुछ भी नहीं पा सकते। सदस्यों की अधिक संख्या के बवजूद भी बिना अभ्यास के सब कुछ व्यर्थ ही है। इसलिए यह ओयाओं का कर्त्तव्य है कि वे सोखाइम्यो से पूर्व अभ्यास की पद्धति से परिचित कराएं। अतः हमें ओया-कोडोमो संबंधों को और सभी कार्यों को ध्यानपूर्वक लेना चाहिए। साधारणतः मित्रगण अपे घरेलू कार्यों में व्यस्त रहते हैं। परंतु जो हमारे साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़े हैं वे हमारे लिए बहुमूल्य हैं। अतः मैं स्वयं को और सभी सदस्यों को बधाई देता हूं।


धन्यवाद
आर.पी. सिन्हा

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