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रेयूकाई भारत
आध्यात्मिक सहचर्य संस्था


 रेयूकाई का अभ्यास >> विकास


यही सकारात्मक व परोपकारी दृष्टिकोण हमें अपने जीवन में परिवर्तन लाने का साहस प्रदान करता है। परिवर्तन जो भले के लिये ही होता है। जैसे ही हम अपने भीतर तथा आसपास होने वाले परिवर्तनों तथा उनके कारणों की ओर ध्यान देना शुरू करते हैं, यह विश्व एक अनियंत्रित स्थान नहीं रह जाता।

यदि हम अपने आसपास होने वाले परिवर्तनों की तरफ ध्यान ना दें, तो हम स्वयं को केवल भविष्य की ही चिंता में मगन पाएंगे और वर्तमान की बली दे बैठेंगे। रेयूकाई का अभ्यास हमें अपने समय और ऊर्जा को अपने संबंधों को सुधारने तथा दैनिक अनुभवों से सीखते रहने की प्रक्रिया द्वारा अपने वर्तमान का भरपूर आनंद लेने के लिये प्रेरित करता है।


निश्चय ही हमें अपनी इच्छाओं, अपनी आवश्यकताओं, व अपने आसपास के वातावरण के तनाव में स्पष्ट अंतर करना आना चाहिये। कुछ लोग अपना जीवन दूसरों को संतुष्ट करने में या समाज के दृष्टिकोण में जो उनके लिये उचित हो वही करने में व्यतीत कर देते हैं। तथा दूसरी तरफ वह लोग हैं जो केवल अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति में ही लगे रहते हैं, कभी न सोचते हुए कि उनके कार्य दूसरों को कैसे प्रभावित करते हैं।


टी. ए. पी. समिति

रेयूकाईकेयर
अध्यात्मिक सहचर्य संस्था

वर्कशाप

आध्यात्मिक सहचर्या संस्था अपने सदस्यों के लिए विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित करती है

ग्रूम ग्रूप वर्कशाप

स्वर व उच्चारण प्रशिक्षण

ध्यान

रेयूकाई की आत्मिक विकास प्रक्रिया या रेयूकाई का जीवन दर्शन सदस्यों को अपनी आवश्यकताओं व आकांक्षाओं की पूर्ति तथा इस प्रक्रिया में दूसरों को सहयोग व प्रोत्साहित करने का प्रयास, इन दोनों ही स्थितियों में सामंजस्य बैठाने में सहायक होता है। इस सामंजस्य को बनाए रखना अत्यंत कठिन है परंतु साथ ही एक उत्तरदायी मानव होने का पारितोषिक भी है।

   
 रेयुकाई जीवनशैली से बढ़कर और भी कुछ है ।
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