रेयूकाई का अभ्यास
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चेतना
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स्वखोज तथा निजी
अनुभवों और वैचारिक प्रतिबिंब द्वारा
हमारे लिये क्या सही है, ही चेतना का
आधार है।
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स्वानुभूति की प्रक्रिया में अपने
मूल को जानना भी शामिल है। जिस प्रकार हम इतिहास की एक ठोस नींव के आधार पर अपने
वर्तमान को सर्वश्रेष्ठ रूप में समझते हैं उसी प्रकार हम अपने व्यक्तिगत तथा
पारिवारिक पृष्ठभूमि के ज्ञान की ठोस नींव के आधार पर स्वयं को सर्वश्रेष्ठ रूप में
जानेंगे। हमारी पृष्ठभूमि से तात्पर्य जन्म से आज तक हुई विभिन्न घटनाओं से ही
नहीं, वरन उन घटनाओं से भी है जो हमारे जन्मदाता तथा अन्य पूर्वजों को भी प्रभावित
करती रहीं। |
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जैसे जैसे अपने पूर्वजों के साथ
अपने सम्बंधों के बारे में हमारी जानकारी बढ़ती जाती है, हमारा मन इस तथ्य को
स्वीकार करता जाता है कि हमारे पूर्वजों के जीवन ने कितना अधिक हमारे विचारों,
हमारी प्रकृति व जीवनशैली को प्रभावित किया है। इसी प्रकार जैसे हम परिपक्व होते
जाते हैं, हमारे पूर्व अनुभवों द्वारा हमारा आचार-विचार संचालित होता है, जो कि
हमारी प्रत्येक क्रिया को प्रभावित करता है। मनोवैज्ञानिक रूप से कहा जाए तो हमारे
पूर्वजों द्वारा प्रदत्त हमारी उत्पत्ति संबंधित जानकारी हमारे व्यक्तिगत जीवन के
अनुभवों के साथ मिश्रित |
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