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रेयूकाई भारत
आध्यात्मिक सहचर्य संस्था


  रेयूकाई का अभ्यास >> चेतना


स्वखोज तथा निजी अनुभवों और वैचारिक प्रतिबिंब द्वारा हमारे लिये क्या सही है, ही चेतना का आधार है।
 

स्वानुभूति की प्रक्रिया में अपने मूल को जानना भी शामिल है। जिस प्रकार हम इतिहास की एक ठोस नींव के आधार पर अपने वर्तमान को सर्वश्रेष्ठ रूप में समझते हैं उसी प्रकार हम अपने व्यक्तिगत तथा पारिवारिक पृष्ठभूमि के ज्ञान की ठोस नींव के आधार पर स्वयं को सर्वश्रेष्ठ रूप में जानेंगे। हमारी पृष्ठभूमि से तात्पर्य जन्म से आज तक हुई विभिन्न घटनाओं से ही नहीं, वरन उन घटनाओं से भी है जो हमारे जन्मदाता तथा अन्य पूर्वजों को भी प्रभावित करती रहीं।

जैसे जैसे अपने पूर्वजों के साथ अपने सम्बंधों के बारे में हमारी जानकारी बढ़ती जाती है, हमारा मन इस तथ्य को स्वीकार करता जाता है कि हमारे पूर्वजों के जीवन ने कितना अधिक हमारे विचारों, हमारी प्रकृति व जीवनशैली को प्रभावित किया है। इसी प्रकार जैसे हम परिपक्व होते जाते हैं, हमारे पूर्व अनुभवों द्वारा हमारा आचार-विचार संचालित होता है, जो कि हमारी प्रत्येक क्रिया को प्रभावित करता है। मनोवैज्ञानिक रूप से कहा जाए तो हमारे पूर्वजों द्वारा प्रदत्त हमारी उत्पत्ति संबंधित जानकारी हमारे व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों के साथ मिश्रित


टी. ए. पी. समिति

रेयूकाईकेयर
अध्यात्मिक सहचर्य संस्था

वर्कशाप

आध्यात्मिक सहचर्या संस्था अपने सदस्यों के लिए विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित करती है

ग्रूम ग्रूप वर्कशाप

स्वर व उच्चारण प्रशिक्षण

ध्यान

होकर ही हमें विशेष प्रकार की प्रकृति, झुकाव तथा तनाव प्रदान करती है जिसे ? पैतृक छवि ?भी कहते हैं। यही छवि हमारे अवचेतन मन में भी बसी रहती है। यही अंतर्मन में बसी छवि हमारी कई क्रियाओं तथा भावनाओं को प्रभावित करती है। क्योंकि यह केवल हमारे अवचेतन मन में निवास करती है, अतः हमें इसका आभास तक नहीं होता इसीलिये हम ना तो इसे पहचान पाते हैं और ना ही नियंत्रित कर पाते हैं परंतु फिर भी हम निरंतर उससे प्रभावित रहते हैं।
 

यहीं पर रेयूकाई विधि बहुउपयोगी सिद्ध होती है। जहां एक ओर रेयूकाई का अभ्यास हमें अपने अंतर्मन में छिपी इन छवियों को ढूँढ़ने तथा पहचानने में मदद करता है, वहीं दूसरी ओर यह अभ्यास सकारात्मक छवियों को अपनाने तथा नकारात्मक छवियों को नकार देने तथा मन से निकालने में भी मदद करता है।
 

?आत्मिक विकास? की प्रक्रिया द्वारा रेयूकाई अभ्यास की मदद से हम यह स्पष्टतः जान पाते हैं कि जो भूतनिर्मित है उसे भविष्य में परिवर्तित किया जा सकता है। यह मात्र पूर्वज स्मरण से ही संभव हो पाता है।

   
 रेयुकाई जीवनशैली से बढ़कर और भी कुछ है ।
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