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पूर्वज स्मरण
 

इस कार्य के लिये आत्मिक विकास की प्रक्रिया में एक विशेष यंत्र का प्रयोग होता है जिसे ?सोकाइम्यो ? अतः पूर्वज प्रतीक कहते हैं। इस पर कुछ सांकेतिक शब्द अंकित होते हैं जो हमारे मातृपक्ष तथा पितृपक्ष दोनों पूर्वजों का प्रतिनिधित्व करते हैं। क्योंकि हमारे अवचेतन मन की प्रत्येक छवि हमारे पूर्वजों द्वारा प्रदत्त है इसीलिये ?सोकाइम्यो? के रूप में उनका प्रतिनिधित्व हमारे ध्यान को उनके द्वारा प्रदत्त हमारे भीतर विद्यमान धरोहर की ओर आकृष्ट करता है। अतः यह एक ऐसे साधन का काम करता है जिसके द्वारा हमारे विचार हमारे अवचेतन मस्तिष्क के स्तर तक पहुंच पाते हैं। 
 

अवचेतन मस्तिष्क के इस स्तर में पहुंचने के बाद यह देखना आवश्यक है कि इसमें है क्या ? इसके लिये एक पुस्तक प्रकाश पुंज का काम करती है जिसे? कमल सूत्र ? कहते हैं, बल्कि इसका भी संक्षिप्त स्वरूप है ?नील सूत्र? जो सही अर्थ में हमारे मन तथा मस्तिष्क को आलोकित कर देता है। अपनी विशिष्ट कार्य प्रणाली के कारण ही ? नील सूत्र ? का विशेषतः प्रयोग किया जाता है।


शाक्यमुनि बुद्ध की शिक्षा तथा विचारों को समाहित करने वाली अन्य रचनाओं से ?कमल सूत्र
? ही सबसे अधिक व्यवहारिक तथा विस्तृत रचना है जिसमें उनका परम संदेश वर्णित है। क्योंकि स्वयं को जानने का ढंग प्रत्येक व्यक्ति के लिये अलग-अलग होता है तथा प्रत्येक व्यक्ति के अनुभव भी अलग-अलग होते हैं, अतः ये अनुभव भी वृहद व अनगिनत होते हैं। यही ? कमल सूत्र ? इन विविध अनुभवों से प्राप्त शोध को प्रेरित करता है इसीलिये इसे अधिकांशतः ? असंख्य अर्थ वाला सूत्र ? भी कहा जाता है।




 

   


रेयुकाई इंडिया जापानी भाषा स्कूल


नई दिल्ली (इंडिया) में निःशुल्क जापानी भाषा कक्षाएं आयोजित की जाती हैं

विवरण सूची एवं पाठ्यक्रम की जानकारी

वर्कशाप

आध्यात्मिक सहचर्या संस्था अपने सदस्यों के लिए विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित करती है


 



पूर्वज स्मरण की इस प्रक्रिया में नील कमल सूत्र का पाठ ऊँची आवाज में किया जाता है, ताकि पठित सूत्र हमारे मस्तिष्क में समाकर हमें सूत्र की शिक्षा में वर्णित ज्ञान की ओर उत्प्रेरित कर सके। दूसरे शब्दों में इस पाठ की ध्वनि तथा आकृति हमें प्रेरित करती है कि हम स्वयं के बारे में जानें तथा उसे प्रतिबिंबित करें। इस सूत्र पाठ से उत्पन्न ध्वनि हमारे अंतर्मन में भी गूंजती है। वहां पहुंचने पर ये प्रतिध्वनियां एक पृथक करने वाले यंत्र की भांति काम करती हैं तथा हमारे अनुभवों से हमारी अंतरात्मा को इस पाठ द्वारा चेतन तथा ज्ञानप्रकाश से आलोकित कर देती हैं। इससे हम स्पष्टतः यह पहचान सकते हैं कि कौन सी स्थिति, प्रकृति तथा तनाव हमें बाधा पहुंचा रहे हैं जिन पर हमें विजय पानी है तथा किन गुणों को हमें अपने भीतरी विकास हेतु उत्साहित तथा प्रेरित करना है। 


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