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सामान्य बैठकें
गया
मार्गदर्शन या मिचिबिकी के द्वारा
ना केवल हम अपने आसपास के लोगों को लाभ पहुँचाने का कार्य करते हैं बल्कि स्वयं
अपने विकास की दिशा में भी कार्य करते हैं। ना केवल अपने मित्रों बल्कि सदस्यों को
भी ऋ वे लोग जिन्हें हमने रेयूकाई से परिचित कराया है - हम प्रमाणित कर सकते हैं कि
किस प्रकार ?पूर्वज प्रतीक? तथा कमल
सूत्र के द्वारा अपने अंतर्मन में झांककर हम उसे आलोकित कर सकते हैं। उन्हें
रेयूकाई से परिचित कराकर हम उनके प्रति अपनी मूल व्यवहार में परिवर्तन ला सकते हैं।
एक ओर
जहां सूत्र-पठन हमारे अवचेतन मन के गुप्त सूत्रों को
मन की सतह पर लाने में सहायक होता है जो हमें अपने
आसपास की वास्तविकता को शीघ्र ग्रहण करने वाला बनाता
है, वहीं मिचिबिकी हमें अहसास कराता है कि कैसे ये
सूत्र हमारी क्रियाओं और परस्पर संबंधों पर प्रभाव
डालते हैं और उन्हें सुधारने में हमारी सहायता करता
है। जिस प्रकार हम अपनी स्वयं की आंखों को दर्पण की
सहायता के बिना नहीं देख पाते, उसी प्रकार हमारे
मस्तिष्क को भी अपना प्रतिबिंब देखने के लिये किसी
बाहरी तत्त्व की मदद चाहिए। मिचिबिकी द्वारा हमें बोध
होता है कि जिन लोगों से हम परस्पर व्यवहारकरते हैं व
अपनी नकारात्मक व सकारात्मक प्रतिक्रियाओं द्वारा
हमारी दुर्बलताएं व बल प्रतिबिंबित करते हैं।
मिचिबिकी में हम अपने कार्यों तथा व्यवहार के प्रभाव
को दूसरों के दृष्टिकोण द्वारा परख पाते हैं। जब तक
हम अपने दृष्टिकोण पर दृढ़ रहते हैं हम स्वयं का
सूक्ष्म से निरीक्षण नहीं कर पाते।
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